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हिंदी पाठकों के लिए एक आत्म-यात्रा

भीतर के प्रकाश तक पहुँचिए —
बिना उलझन, बिना समय गँवाए

“स्वयं-प्रकाश” 12 अध्यायों की एक सरल आत्म-यात्रा है — अंधकार और बेचैनी को समझने से लेकर मौन, ध्यान, प्रेम और एकत्व तक. कोई उपदेश नहीं, कोई कठिन शब्दावली नहीं — सिर्फ़ वह मार्ग जिस पर आप आज से चल सकें.

  • हर अध्याय में व्यावहारिक अभ्यास और जीवन के उदाहरण
  • दोहे, छंद और “एक वाक्य में सार” — याद रखने में आसान
  • शुरुआत करने वालों के लिए भी उतना ही सरल

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स्वयं-प्रकाश — एक आत्मयात्रा, लेखक रणजीत चोकोटिया

12 अध्याय · हिंदी · PDF · प्रथम संस्करण · 2025

उन पाठकों के लिए जो अंतहीन सिद्धांत नहीं, भीतर उतरने का व्यावहारिक मार्ग चाहते हैं।

  • 12 अध्याय
  • सरल हिंदी
  • तुरंत एक्सेस
  • आजीवन एक्सेस

क्या भीतर की बेचैनी अब भी वहीं है?

बाहर सब ठीक दिखता है, पर भीतर कुछ ठहर-सा गया है। यही वह जगह है जहाँ से यह पुस्तक शुरू होती है।

  • कहाँ से शुरू करें, समझ नहीं आता

    आध्यात्म पर सामग्री तो बहुत है, पर पहला कदम कौन-सा हो — यह कोई नहीं बताता।

  • जानकारी बहुत, अनुभव शून्य

    पढ़ते बहुत हैं, पर भीतर कुछ बदलता नहीं। ज्ञान सिर में रह जाता है, हृदय तक नहीं उतरता।

  • भाषा इतनी कठिन कि मन हट जाए

    संस्कृत-भारी और जटिल किताबें पढ़ते-पढ़ते उत्साह बीच में ही टूट जाता है।

  • अभ्यास टिकता ही नहीं

    ध्यान दो दिन चलता है, फिर छूट जाता है — क्योंकि कोई स्पष्ट क्रम नहीं होता।

यह पुस्तक उलझन से अभ्यास तक का एक साफ़ रास्ता देती है।

उलझन से → स्थिरता तक

पढ़ने से पहले और बाद में — फ़र्क़ सिर्फ़ दिशा का है।

पहले

  • मन लगातार भटकता है
  • जानकारी का बोझ, दिशा नहीं
  • अभ्यास शुरू होकर छूट जाता है
  • बेचैनी को दबाने की कोशिश
  • “मैं कौन हूँ” — बस एक प्रश्न

बाद में

  • मन को देखना आ जाता है
  • 12 अध्यायों का स्पष्ट क्रम
  • रोज़ का सरल, टिकने वाला अभ्यास
  • बेचैनी को समझकर पार करना
  • “मैं कौन हूँ” — एक जीवंत अनुभव

एक ही पुस्तक में, पूरी यात्रा

12 अध्याय — हर अध्याय में विवेचन, जीवन के उदाहरण, अभ्यास, दोहा और एक वाक्य में सार।

  1. अध्याय 1

    अंधकार का अनुभव : जब मन भटकता है

    जहाँ बाहरी जग टूटता है और भीतर का मौन पुकारता है।

  2. अध्याय 2

    मैं कौन हूँ : पहचान का जागरण

    जहाँ आत्मा स्वयं को देखना शुरू करती है।

  3. अध्याय 3

    स्वयं-प्रकाश : भीतर की जागृति

    जहाँ भीतर का दीपक स्वयं जल उठता है।

  4. अध्याय 4

    मौन की वाणी : जब शब्द रुक जाते हैं

    जहाँ मौन स्वयं उत्तर बन जाता है।

  5. अध्याय 5

    मन और माया : भ्रम का पारावार

    जहाँ मन अपने ही जाल को पहचानने लगता है।

  6. अध्याय 6

    प्रेम : अस्तित्व की शुद्धतम भाषा

    जहाँ भक्ति और एकत्व का मिलन होता है।

  7. अध्याय 7

    समर्पण : स्वयं को छोड़ देने की कला

    जहाँ अहंकार घुलता है और शांति उतरती है।

  8. अध्याय 8

    ध्यान : भीतर की यात्रा की विधि

    जहाँ देखने वाला स्वयं दृष्टि बन जाता है।

  9. अध्याय 9

    कर्म और करुणा : जग में रहते हुए जागे रहना

    जहाँ ध्यान, कर्म और करुणा एक सूत्र में बंधते हैं।

  10. अध्याय 10

    एकत्व : सबमें वही, सब वही

    जहाँ “मैं” और “वह” का भेद मिट जाता है।

  11. अध्याय 11

    अनंत मौन : जहाँ सब विलीन होता है

    जहाँ अनुभव भी रुक जाता है, केवल अस्तित्व बचता है।

  12. अध्याय 12

    स्वयं-प्रकाश : भीतर से जग तक

    जहाँ भीतर का प्रकाश बाहर फैलने लगता है।

इसके अलावा पुस्तक में शामिल

  • समर्पण
  • पाठकों से निवेदन
  • भूमिका
  • उपसंहार — जब यात्रा मौन में बदल जाती है
  • आभार
  • लेखक परिचय

पढ़ने के बाद आप क्या कर पाएँगे

फ़ीचर नहीं — वास्तविक बदलाव, जो अभ्यास से आता है।

  • बेचैनी को दिशा में बदलना

    जब भीतर खालीपन उतरे, तो उससे भागने के बजाय उसे पढ़ना और उसका उपयोग करना आ जाएगा।

  • अपनी असली पहचान देखना

    शरीर, विचार और भावनाओं की परतों से अलग होकर उस “देखने वाले” को पहचानना सीखेंगे।

  • रोज़ का ध्यान, जो टिके

    ध्यान की सरल विधि — बिना कठिन नियम, बिना विशेष जगह या समय की शर्त।

  • मन के भ्रम को पहचानना

    मन और माया का खेल समझ आते ही प्रतिक्रिया की जगह ठहराव आना शुरू होता है।

  • काम करते हुए भी जागे रहना

    संसार छोड़े बिना — कर्म और करुणा को ही साधना बना लेने का व्यावहारिक तरीक़ा।

  • मौन में स्थिर होना

    जहाँ शब्द रुकते हैं, वहाँ ठहरना — और उस ठहराव को रोज़मर्रा में साथ रखना।

अंदर झाँककर देखिए

पुस्तक का स्वरूप और भीतर के पन्नों की एक झलक।

स्वयं-प्रकाश — एक आत्मयात्रा, लेखक रणजीत चोकोटिया
  • पेज प्रीव्यू जल्द जोड़े जाएँगे

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यह पुस्तक आपके लिए है, अगर…

  • आप शुरुआत कर रहे हैं

    आध्यात्म में रुचि है, पर पहला कदम कहाँ रखें — यह स्पष्ट नहीं।

  • भीतर बेचैनी है

    बाहर सब ठीक है, फिर भी एक खालीपन साथ चलता रहता है।

  • ध्यान सीखना चाहते हैं

    बिना जटिल नियमों के, एक सहज और टिकने वाली विधि चाहिए।

  • हिंदी में पढ़ना पसंद है

    सरल हिंदी में गहरी बात — बिना भारी शब्दावली के।

  • “मैं कौन हूँ” प्रश्न उठा है

    यह प्रश्न भीतर से उठता है, और अब उत्तर तक जाने का मन है।

  • गृहस्थी में रहते हुए साधना

    संसार छोड़े बिना, रोज़ के काम में ही जागरूकता रखना चाहते हैं।

यह शायद आपके लिए नहीं है, अगर…

हम चाहते हैं कि आप सही कारण से ही यह पुस्तक लें।

  • आप पैसे या भौतिक सफलता का शॉर्टकट फ़ॉर्मूला ढूँढ रहे हैं
  • आप कर्मकांड, ज्योतिष या धार्मिक नियमों की पुस्तक चाहते हैं
  • आप पढ़ना तो चाहते हैं, पर कोई अभ्यास नहीं करना चाहते
  • आप अंग्रेज़ी में पढ़ना पसंद करते हैं — यह पुस्तक पूरी तरह हिंदी में है
  • आप चमत्कार या तुरंत परिणाम की अपेक्षा रखते हैं

लेखक परिचय

रणजीत चोकोटिया

एक खोजी आत्मा

रणजीत चोकोटिया कोई लेखक नहीं, बस एक यात्री हैं — जो जीवन की राहों पर भटकते-भटकते एक दिन अपने भीतर का प्रकाश देख बैठे।

उनके लिए लेखन कोई अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि प्रार्थना है। वे मानते हैं कि हर मनुष्य के भीतर एक मौन दीपक जल रहा है, जो बस जागृत होने की प्रतीक्षा में है।

“स्वयं-प्रकाश” उनकी कलम से नहीं, उनके अनुभव से निकली है। यह पुस्तक किसी धर्म या मत की बात नहीं करती — यह केवल उस अदृश्य निकटता की बात करती है, जहाँ मनुष्य और परमात्मा एक-दूसरे को पहचानते हैं।

“जीवन कोई हल करने योग्य पहेली नहीं, यह तो पहचानने योग्य प्रेम है।”

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुगतान के बाद मुझे क्या मिलेगा?

आपको “स्वयं-प्रकाश” eBook की पूरी डिजिटल कॉपी मिलेगी — सभी 12 अध्याय, साथ में समर्पण, भूमिका, उपसंहार और लेखक परिचय।

eBook मुझ तक कैसे पहुँचेगी?

भुगतान पूरा होते ही आपको डाउनलोड लिंक मिल जाएगा।

क्या यह PDF है?

जी हाँ — यह एक डिजिटल PDF है, कोई छपी हुई किताब नहीं भेजी जाती।

क्या मैं इसे मोबाइल पर पढ़ सकता हूँ?

जी हाँ। आप इसे मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप — किसी भी डिवाइस पर पढ़ सकते हैं।

क्या आजीवन एक्सेस मिलता है?

जी हाँ। एक बार खरीदने के बाद फ़ाइल आपकी है — कोई सब्सक्रिप्शन या रिन्यूअल नहीं।

यह पुस्तक किसके लिए है?

उन पाठकों के लिए जो सरल हिंदी में आत्म-जागरण, ध्यान और भीतर की शांति का व्यावहारिक मार्ग चाहते हैं — चाहे वे बिलकुल शुरुआत कर रहे हों।

क्या यह किसी धर्म या मत से जुड़ी है?

नहीं। पुस्तक स्वयं कहती है कि यह किसी धर्म या मत की बात नहीं करती — यह केवल भीतर उतरने का आमंत्रण है।

शुरुआत करने के लिए तैयार हैं?

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